

desertcart.in - Buy NARAZ book online at best prices in India on desertcart.in. Read NARAZ book reviews & author details and more at desertcart.in. Free delivery on qualified orders. Review: Good collection - Attractive getup. Good poetry collected. Review: नाराज राहत इन्दोरी मंजुल कुछ शेर जो अच्छे लगे यह पेज 1 से 63 तक के ही है(पुस्तक मे 125 पेज है ) जितने अपने थे सब पराये थे हम हवा को गले लगाए थे मै बस्ती मे आखिर किस से बात करू मेरे जैसा कोई पागल भेजो ना इस बस्ती के लोगो से जब बाते की तो यह जाना दुनिया भर को जोड़ने वाले अंदर अंदर बिखरे है उंगलिया युँ न सब पर उठाया करो खर्च करने से पहले कमाया करो जिंदगी क्या है ख़ुद ही समझ जाओगे बारिशो मे पतंगे उड़ाया करो बारिशो से तो प्यास बुजती नहीं आईये जहर पी के देखते है बैठे बैठे कोई सवाल आया जिन्दा रहने का फिर सवाल आया पुराने शहरों के मंजर निकलने लगते है जमीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते है हसीन लगते है जाड़ो मे सुबह के मंजर सितारे धूप पहन कर निकलने लगते है अगर ख्याल भी आए की तुझ को खत लिखू तो घोसलों से कबूतर निकलने लगते है अपने दीवार ओ दर से पूछते है घर के हालत घर से पूछते है क्या कही कत्ल हो गया सूरज रात से रात भर पूछते है सोये रहते है ओढ़ कर ख़ुद को अब जरुरत नहीं रजाई की अंदर का जहर चूम लिया धुल के आ गए कितने शरीफ लोग थे सब खुल के आ गए मै उस मोहल्ले मे एक उम्र काट आया हूँ जहाँ पे घर नहीं मकान मिलते है जहाँ जहाँ भी चिरागो ने खुदखुशी की है वहां वहां पे हवा के निशान मिलते है ख़ुद को पत्थर सा बना रखा है कुछ लोगो ने बोल सकते है मगर बात ही कब करते है किसने दस्तक दी ये दिल पर कौन है आप तो अंदर है, बाहर कौन है एक पाठक CA CS उत्कर्ष गर्ग



| Best Sellers Rank | #3,421 in Books ( See Top 100 in Books ) #33 in Poetry (Books) |
| Country of Origin | India |
| Customer Reviews | 4.4 4.4 out of 5 stars (1,806) |
| Dimensions | 21.59 x 13.97 x 2.54 cm |
| Generic Name | Book |
| ISBN-10 | 8183227023 |
| ISBN-13 | 978-8183227025 |
| Importer | Manjul Publishing House Pvt Ltd., C-16, Sector-3, Noida - 201301 (UP) |
| Item Weight | 1 kg 50 g |
| Language | Hindi |
| Net Quantity | 130.00 Grams |
| Packer | Manjul Publishing House Pvt Ltd., C-16, Sector-3, Noida - 201301 (UP) |
| Print length | 130 pages |
| Publication date | 26 February 2016 |
| Publisher | Manjul |
J**.
Good collection
Attractive getup. Good poetry collected.
U**G
नाराज राहत इन्दोरी मंजुल कुछ शेर जो अच्छे लगे यह पेज 1 से 63 तक के ही है(पुस्तक मे 125 पेज है ) जितने अपने थे सब पराये थे हम हवा को गले लगाए थे मै बस्ती मे आखिर किस से बात करू मेरे जैसा कोई पागल भेजो ना इस बस्ती के लोगो से जब बाते की तो यह जाना दुनिया भर को जोड़ने वाले अंदर अंदर बिखरे है उंगलिया युँ न सब पर उठाया करो खर्च करने से पहले कमाया करो जिंदगी क्या है ख़ुद ही समझ जाओगे बारिशो मे पतंगे उड़ाया करो बारिशो से तो प्यास बुजती नहीं आईये जहर पी के देखते है बैठे बैठे कोई सवाल आया जिन्दा रहने का फिर सवाल आया पुराने शहरों के मंजर निकलने लगते है जमीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते है हसीन लगते है जाड़ो मे सुबह के मंजर सितारे धूप पहन कर निकलने लगते है अगर ख्याल भी आए की तुझ को खत लिखू तो घोसलों से कबूतर निकलने लगते है अपने दीवार ओ दर से पूछते है घर के हालत घर से पूछते है क्या कही कत्ल हो गया सूरज रात से रात भर पूछते है सोये रहते है ओढ़ कर ख़ुद को अब जरुरत नहीं रजाई की अंदर का जहर चूम लिया धुल के आ गए कितने शरीफ लोग थे सब खुल के आ गए मै उस मोहल्ले मे एक उम्र काट आया हूँ जहाँ पे घर नहीं मकान मिलते है जहाँ जहाँ भी चिरागो ने खुदखुशी की है वहां वहां पे हवा के निशान मिलते है ख़ुद को पत्थर सा बना रखा है कुछ लोगो ने बोल सकते है मगर बात ही कब करते है किसने दस्तक दी ये दिल पर कौन है आप तो अंदर है, बाहर कौन है एक पाठक CA CS उत्कर्ष गर्ग
R**T
Excellent but read it below 😄 and where are my bookmarks not given bookmarks in single book
Excellent book just variation in price is too much please sell the book at good price now the book of price is reduced and I had buyed it in higher cost, feels bad overall good and quality is excellent just issue of price
S**A
Loved it
Totally amazed ❤️
P**H
Good
Good
S**R
Nice collection of poetry
It was good experience to read it. Few of the poetries are very good. I enjoyed reading them. Few are not as per the name of Rahat sahab.
A**I
Good
Good quality
R**.
I really enjoyed
Some of the Ghazals are really touched my heart ❤️. Whenever I read this ghazals, wo andaz Rahat Indori ka samne aa jata hain.....
P**H
Nyc book and very good poetry by rahat indori. I like it. And also nyc sayri . Thank you rahat indaur i
Trustpilot
3 weeks ago
2 weeks ago